Mehrangarh Fort Jodhpur in Hindi

नमस्ते दोस्तों | सफर इंडिया में आपका फिर से स्वागत है यहाँ पर आपको भारत के पर्यटन स्थल, भारत के प्रमुख राजवंश, प्रमुख मंदिर, भारत के प्रमुख हिन्दू शासक आदि के बारे में सारी जानकारी मिलेगी जो आप जानना चाहते है|

भारत एक ऐसा देश है जिसकी खूबसूरती, संस्कृति , के आगे बाकि सब देश फीके है आज हम आपको भारत के प्राचीन धरोहर और ऐतिहासिक इमारतों में से एक राजस्थान के जोधपुर मे स्थित Mehrangarh Fort, Jodhpur के बारे में बतायेगे|


लगभग 600 साल पुराना यह किला आज भी जोधपुर में आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद है| चलिए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते है



Mehrangarh Fort Jodhpur Rajasthan


Mehrangarh ka kila
भारत के राजस्थान राज्य में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला एक पथरीली चट्टान पहाड़ी पर बना हुआ है यह किला मैदान से लगभग 125  मीटर की ऊँचाई पर स्थित है यह किला आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा हुआ है। यह किला बहुत ही खूबसूरत होने के साथ साथ आज भी लोगो के आकर्सन का मुख्य केंद्र बना हुआ 

Mehrangarh Fort Jodhpur in Hindi
Mehrangarh Fort Jodhpur

इस किले के अंदर कई भव्य महल जैसे मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि स्थित है। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। जोधपुर का मेहरानगढ़ किला 125 मीटर ऊंची एक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस तरह से यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई (73मीटर) से भी ऊंचा है। 


Mehrangarh Fort Jodhpur History

इस किले का निर्माण राव जोधा ने 13 मई 1459 में शुरू किया था| राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की 24  संतानों मे से एक थे। वे जोधपुर के पंद्रहवें शासक बने। शासन की बागडोर सम्भालने के एक साल बाद जब राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है।

तब उन्होंने इस किले के निर्माण के बारे सोचा ,राव जोधा इस किले को पहले जोधपुर में ही स्थित मसूरिया की पहाड़ी पर बनाना चाहते थे | लेकिन वहा पानी की कमी होने के कारन उन्होंने पंचेटीया पहाड़ी पर किले को बनाने का निच्च्य किया


पंचेटीया पहाड़ी को चिड़िया की टुक भी कहते थे क्यों की वह बहुत साडी चिड़िया रहती थी | जब राव जोधा इस पहाड़ी को देखने पहुंचे तो उन्होंने देखा की एक बकरी बाघ से लड़ रही थी उस पहाड़ पर पहले शेरो की गुफा हुआ करती थी | ये दृश्य देखकर जोधा जी ने किले का निर्माण यही करने का फैसला कर लिया |



Mehrangarh Fort Jodhpur History

इस पहाड़ी के पास एक चिड़िया नाथ नमक योगी रहता था और वही एक झरने  के पास बैठकर तपस्या किया करता  था | जब राजा के सैनिकों ने योगी को बताया की राजा यहाँ दुर्ग बनाना चाहते हे उन्हें अपनी कुटिया यहाँ से हटानी पड़ेगी तो योगी राजी नहीं हुआ |


 राव जोधा जी ने भी किले को यही बनाने का फैसला कर लिया था इसलिए उन्होंने किले का निर्माण आरम्भ करवा दिया | इस से गुस्सा होकर योगी चिड़िया नाथ वहां से अपनी कुटिया उजाड़ कर चला गया और जाते जाते राव जोधा को श्राप दिया की जिस पानी के कारन मेरी तपस्या भंग हुई  वो पानी तुजे कभी नसीब नहीं होगा |


माना जाता है की उसके बाद जोधपुर में कही सालो तक अकाल रहा जो इंदरा गाँधी नहर के बाद समाप्त हुआ| राजा ने उस योगी की कुटिया के स्थान पर एक शिव मंदिर और पानी का छोटा कुंडा बनवाया था |


इस किले का नाम पहले मिहिर गढ़ था बाद में इसे बदलकर मेहरानगढ़ कर दिया गया | राव जोधा ने 12 मई 1459 ई. को इस पहाडी पर किले की नीव डाली और बाद में महाराज जसवंत सिंह (१६३८-७८) ने इसके निर्माण को  पूरा किया।



Mehrangarh Fort Jodhpur Architecture


मूल रूप से इस किले के सात द्वार (पोल) है और आठवाँ द्वार गुप्त हैं। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। अन्य द्वारों में शामिल जयपोल द्वार का निर्माण 1804  में महाराज मान सिंह ने अपनी जयपुर और बीकानेर पर विजय प्राप्ति के बाद करवाया था।

फतेह पोल अथवा विजय द्वार का निर्माण महाराज अजीत सिंह ने मुगलों पर अपनी विजय की स्मृति में करवाया था। किले के सभी पोल व द्वारो का क्रम सकरा, घुमावदार बनाया गया हे ताकि दुसमन आसानी से किले के भीतर प्रवेश न कर सके |


दुर्ग के सभी महलो के अंदर इस्तमाल किये गए पलास्टर में कोड़ी का पाउडर उपयोग किया गया जिस से कही साल बीत जाने के बाद भी दीवारे चमकदार व रंगीन दिखती है इसके अलावा महल के अंदर की गयी कारीगरी दीवारों की नक्कासी आपकी नजरो को वहा से हटने नहीं देगी |



Chamunda Mata Temple 


राव जोधा को चामुँडा माता मे अति श्रद्धा थी। Chamunda Mata जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है। राव जोधा ने मेहरानगढ किले के समीप Chamunda Mata Mandir का निर्माण करवाया और मूर्ति की स्थापना की।  चामुंडा माता के दर्सन हेतु मंदिर के द्वार आम जनता के लिए हमेंशा खुले रहते  है|


Chamunda Mata Temple

चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी है  और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। और पुरे जोधपुर शहर से यहां लोग देवी के दरसन और पूजा करने आते है | 



Mehrangarh Fort Jodhpur Movie Shooting


मेहरानगढ़ फोर्ट में हॉलीवुड व बॉलिवुड फिल्मों की भी शूटिंग हुई है  अंग्रेजी फिल्म की बात करे तो डार्क नाइट के कुछ हिस्से भी मेहरानगढ़ में फिल्माए जाने के बाद यह हॉलीवुड के लिए भी एक शानदार डेस्टीनेशन बन गया। यहां ब्रूस वेन को कैद करने, जेल पर हमला करने आदि के दृश्य फिल्माए गए थे।


हिंदी फिल्म की बात करे तो जोधा अकबर , वीर , अजय देवगन की बादशाओ की भी शूटिंग इसी फोर्ट में हो रखी है 

Mehrangarh ka Kila पर्यटकों के लिए हमेंशा खुला रहता हे जहा हर साल लाखों पर्यटक मेहरानगढ़ किले में घूमने आते हैं, न केवल देश से बल्कि विदेशों से भी, कई पर्यटक यहां मेहरानगढ़ के किले में आते हैं। मेहरानगढ़ दुर्ग में ऐसी बहुत सी जगह हे जिसे देखकर आप यहाँ दोबारा जरूर आना चायेगे|

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