History of Konark Surya Mandir In Hindi || Surya Mandir of Konark


नमस्ते दोस्तों सफर इंडिया में आपका स्वागत है | आज हम बात कर रहे हे भारत के प्राचीन मंदिर में से एक Surya Mandir of Konark के बारे में | आज हम आपको इस मंदिर से जुड़ी सारी जानकारी बतायेगे |

Surya Mandir Konark in Hindi


 Surya Mandir konark भारत के उड़ीसा राज्य में जगन्नाथ पुरी से लगभग 35 किमी उत्तर-पूर्व की और कोणार्क नामक शहर में स्थित है। यह भारत के प्राचीन सूर्य मन्दिरों में से एक है। यूनेस्को ने सन् 1949 में इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।


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Surya Mandir Konark

Surya Mandir of Konark भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। इस मन्दिर की खूबसूरती और कला का अंदाजा यंहा के पत्थरों पर किये गए उत्कृष्ट नकासी से लगा सकते है |


कोर्णाक का मंदिर सूर्य भगवान को समर्पित था, जिन्हें वहा के स्थानीय लोग 'बिरंचि-नारायण' भी कहते थे। रथ के आकार में बनाया गया सूर्य मंदिर भारत की मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है।


Surya Mandir के प्रवेश पर दो सिंह हाथियों पर आक्रामक होने पर रक्षा में तत्पर रहते हुई दिखाया गया है  दोनों हाथी, एक-एक मानव के ऊपर स्थापित हैं। ये प्रतिमाएं एक ही पत्थर की बनीं हैं। मंदिर के दक्षिणी भाग में दो सुन्दर घोड़े बने हैं, जिन्हें उड़ीसा सरकार ने अपने राजचिह्न के रूप में स्वीकार कर लिया है।


मंदिर सूर्य देव की भव्य यात्रा को दिखाता है। इसके के प्रवेश द्वार पर ही नट मंदिर है। जहां मंदिर की नर्तकियां, सूर्यदेव को अर्पण करने के लिये नृत्य किया करतीं थीं। मंदिर अब अंशिक रूप से खंडहर में परिवर्तित हो चुका है।


यहां की शिल्प कलाकृतियों का एक संग्रह, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सूर्य मंदिर संग्रहालय में सुरक्षित है।



Surya Mandir Konark History in Hindi


पुराणी कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को उनके श्राप से कोढ़ रोग हो गया था। तब साम्ब ने कोणार्क में चंद्रभागा नदी के सागर संगम पर बारह वर्षों तक कठोर तपस्या की और सूर्य भगवान् को प्रसन्न किया था।


ऐसा माना जाता हे की जब भगवन सूर्यदेव (जो सभी रोगों के नाशक थे) उन्होंने साम्ब के रोग का भी निवारण कर दिया था। तदनुसार साम्ब ने सूर्य भगवान का एक मन्दिर बनाने का फैसला किया। जब  साम्ब अपने रोग-नाश के पहले चंद्रभागा नदी में स्नान कर रहे थे तब उन्हें भगवान्  सूर्यदेव की एक मूर्ति मिली।


यह मूर्ति देवशिल्पी श्री विश्वकर्मा ने सूर्यदेव के शरीर के ही भाग से बनायी थी। साम्ब ने अपने बनवाये मित्रवन में एक मन्दिर का निर्माण किया और  इस मूर्ति को वहा स्थापित किया, तब से यह स्थान पवित्र माना जाने लगा।


और वही कई इतिहासकारों का यह मानना है की राजा नृसिंह देव प्रथम ने अपने वंश का वर्चस्व रखने के लिए  राजसी घोषणा से इस मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था। तब एक साथ बारह सौ वास्तुकारों और कारीगरों की सेना ने अपनी प्रतिभा और अद्भुत कला से बारह वर्षों की मेहनत से इस मंदिर का निर्माण किया।


राजा नृसिंह देव ने पहले ही अपने राज्य के बारह वर्षों की कर-प्राप्ति के बराबर धन मंदिर बनाने में व्यय कर दिया था। लेकिन मंदिर का निर्माण पूरा होता नजर नहीं आ रहा था | तब राजा ने सेनिको को एक निश्चित तिथि तक कार्य को पूरा करने का कड़ा आदेश दिया।


तब बिसु महाराणा जिनके पर्यवेक्षण में इस मंदिर का निर्माण हो रहा था | उनका बारह वर्षीय पुत्र धर्म पाद ने इस मंदिर के निर्माण को पूरा करने का फैसला किया। धर्म पाद को मंदिर निर्माण का पूरा व्यवहारिक ज्ञान तो नहीं था| पर उसने मंदिर के स्थापत्य के शास्त्रों का पूर्ण अध्ययन किया हुआ था।


जिसकी मदद से उसने मंदिर के अंतिम केन्द्रीय शिला को लगाने की समस्या सुझाव का प्रस्ताव दिया। उसने यह करके सबको आश्चर्य में डाल दिया था क्यों की इसमें जान जाने का भी खतरा रहता है इसके तत्पचात ही इस विलक्षण प्रतिभावान धर्म पाद का शव सागर तट पर मिला। कहते हैं, कि धर्मपाद ने अपनी जाति के हितो के लिए अपनी जान तक दे दी।



Architecture of Surya Mandir konark 


कलिंग शैली में निर्मित Surya Mandir में सूर्य देव (अर्क) को रथ के रूप में विराजमान किया गया है तथा पत्थरों को

एक उत्कृष्ट नक्काशी के रूप बनाया गया है। जो वाकई में बहुत ही खूबसूरत है | तेरहवीं शताब्दी का मुख्य आकर्सन
सूर्य मंदिर, एक महान रथ रूप में बना है, जिसमे  बारह जोड़ी पथरो से निर्मित सुसज्जित  पहिए हैं, और इसे 
सात घोड़ों द्वारा खिसते हुए दिखाया हुआ है। 

यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट स्मारक स्थलों में से एक है। इस मंदिर में स्थापत्यकला वैभव एवं मानवीय निष्ठा का सौहार्दपूर्ण संगम है।

मंदिर की प्रत्येक शिला, अद्वितीय सुंदरता और शोभा की शिल्पाकृतियों से परिपूर्ण है। इस मंदिर में शिल्प आकृतियां भगवानों, 
देवताओं, गंधर्वों, मानवों, वाद्यकों, प्रेमी युगलों, दरबार की छवियों,शिकार एवं युद्ध के चित्रों से भरी हैं। 

 Surya Mandir  भारतीय मंदिरो की कलिंग शैली का मंदिर है, जिसमें मीनार रूपी ऊपर मण्डप की तरह छतरी ढकी होती है। यह मंदिर आकृति में, उड़ीसा के अन्य शिखर मंदिरों के जैसा ही लगता है | इस मंदिर का मुख्य गर्भगृह 229 फीट ऊंचा और 126 फीट ऊंची नाट्यशाला के साथ ही बना है। इसमें बाहर की और अनेक आकृतियां बनी हुई हैं। मंदिर के मुख्य गर्भ में प्रधान देवता का वास था, किंतु वर्तमान में वह अब ध्वस्त हो चुका है।


मंदिर के नट मंदिर एवं भोग मण्डप के कुछ  भाग भी  ध्वस्त हुए हैं। यह मंदिर पूर्व –पश्चिम दिशा में बना है। सूर्य मंदिर खूबसूरत प्राकृतिक हरियाली से घिरा हुआ है। इसमें रेतीली भूमि  में उगने वाले कैज़ुएरिना एवं अन्य वृक्ष लगे हैं, यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा बनवाया गया खूबसूरत  उद्यान भी  है।


सूर्य मंदिर अपनी कामुक मुद्राओं वाली शिल्पाकृतियों के लिये भी प्रसिद्ध है। इन आकृतियों को अत्यंत कोमलता एवं लय में संजो कर दिखाया गया है। मंदिर में जीवन का दृष्टिकोण, हजारों मानव, पशु एवं दिव्य लोग इस जीवन रूपी मेले में कार्यरत हुए दिखाए गए  हैं



इस मन्दिर में सूर्य भगवान की मुख्य तीन प्रतिमाएं हैं:


पहली प्रतिमा उदित सूर्य बाल्यावस्था की हे जो  4 फीट उची है

दूसरी प्रतिमा मध्याह्न सूर्य युवावस्था की हे जो 9.5 फीट उची है
और तीसरी प्रतिमा अपराह्न सूर्य प्रौढ़ावस्था - की हे जो 3.5 फीट उची है |

ऐसा शानदार मंदिर शायद ही कही देखने को मिले!  इसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहाँ आते हैं। यहाँ की सूर्य प्रतिमा पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षित रखी गई है और अब यहाँ कोई भी देव मूर्ति नहीं है।


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