Ambaji Mata Temple, Gujarat || अम्बाजी माता मंदिर

नमस्ते दोस्तों | सफर इंडिया (saffer india) में आपका स्वागत है जैसा की हम सब जानते है भारत एक बहुत ही प्राचीन देश है और इस देश में बहुत से ऐसे प्रचीन मंदिर और धरोहर मौजूद है जो हजारो वर्षो पहले बनाये गए थे और आज भी उसी अवस्था और सुंदरता के साथ खड़े है |

भारत के प्रचीन मंदिर और धरोहर के बारे में हम आपके बीच में जानकारी लाते रहते है आज भी हम आपके लिए एक ऐसे ही मंदिर के बारे में जानकारी लाये है जो बहुत ही प्राचीन और भव्य  मंदिर है | Amba Mata Mandir Ambaji.



Ambaji Mata Mandir Gujarat


आज हम बात कर रहे हैं गुजरात में स्थित Ambaji Mata Mandir के बारे में| ये एक बहुत ही प्राचीन और भव्य मंदिर हैं| हजारो साल से मौजूद ये प्राचीन मंदिर आज भी लोगो की आस्था का प्रमुख केंद्र है| जहा पर देश के हर कोने से लोग माता के दरसन हेतु और अपनी मनोकामना पूरी करने आते है|


Ambaji Mandir Gujrat

Ambaji Mata Temple गुजरात के पालनपुर से लगभग 45 कि॰मी॰ और आबू रोड से 20  किमी, दूरी पर गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरासुर पर्वत पर स्थित है। 



Shree Ambaji Mata Temple


माना जाता है कि Ambaji Mata Ka Mandir लगभग बारह सौ साल पुराना है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है। श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं। अम्बाजी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था। वहीं भगवान राम भी शक्ति की उपासना के लिए यहां आ चुके हैं।

अम्बाजी माता मन्दिर में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, केवल पवित्र श्री यंत्र की पूजा मुख्य आराध्य रूप में की जाती है। इस यंत्र को कोई भी सीधे आंखों से देख नहीं सकता एवं इसकी फ़ोटोग्राफ़ी का भी निषेध है। मां अम्बाजी की मूल पीठस्थल कस्बे में गब्बर पर्वत के शिखर पर है।


बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां तीर्थयात्रा करने वर्ष पर्यन्त आते रहते हैं, विशेषकर पूर्णिमा के दिन। भदर्वी पूर्णिमा के दिन यहाँ बड़ा मेला लगता है। पुरे देश भर से यह लोग माता अम्बाजी के दर्शन के लिए आते है खासकर गुजरात और राजस्थान से लोग पेदल चलकर माँ अम्बाजी के यह दरसन करने और अपनी मनोकामना पूरी करने आते है 


 इस समय पूरे अम्बाजी कस्बे को दीपावली की तरह प्रकाश से सजाया जाता है। और माता अम्बाजी के इस श्रीयंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां साक्षात विराजी हैं।


नवरात्रि में यहां का वातावरण आकर्षक और शक्तिमय रहता है। नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में श्रद्धालु दूर दूर से बड़ी संख्या में यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस समय मंदिर प्रांगण में गरबा करके शक्ति की आराधना की जाती है।


 पुरे गुजरात से लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ मां के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। व्यापक स्तर पर मनाए जाने वाले इस समारोह में ‘भवई’ और ‘गरबा’ जैसे नृत्यों का प्रबंध किया जाता है। साथ ही यहां पर ‘सप्तशती’ (मां की सात सौ स्तुतियां) का पाठ भी आयोजित किया जाता है। प्रत्येक माह पूर्णिमा और अष्टमी तिथि पर यहां मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां फोटोग्राफी निषेध है।


अम्बाजी मन्दिर हिन्दुओं की 51शक्ति-पीठों में से एक है। देवी की 51 शक्तिपीठों में से 12  प्रमुख शक्ति पीठ इस प्रकार से हैं:- मां भगवती , महाकाली मां शक्ति उज्जैन, माँ कामाक्षी कांचीपुरम, माता ब्रह्मरंध्र, श्रीशैलम में, श्री कुमारिका  कन्याकुमारी, महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर, देवी ललिता प्रयाग, विन्ध्यवासिनी देवी विन्ध्याचल, विशालाक्षी वाराणसी, मंगलावती गया एवं मां सुंदरी बंगाल में तथा गुह्येश्वरी नेपाल में।


मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर गब्बर नामक पहाड़ है। यहां पर पवित्र गुप्त नदी सरस्वती का उद्गम स्थान और अरासुर पहाड़ी पर प्राचीन पर्वतमाला अरावली के दक्षिण-पश्चिम में क्षेत्रफ़ल में अम्बाजी शक्तिपीठ स्थित है।


यह ५१ शक्तिपीठों में से एक है जहां मां सती का हृदय गिरा था। इसका उल्लेख "तंत्र चूड़ामणि" में भी मिलता है। इस गब्बर पर्वत के शिखर पर देवी का एक छोटा मंदिर स्थित है जिसकी पश्चिमी छोर पर दीवार बनी है। यहां नीचे की तरफ 111 सीढ़िया है जिसके सहारे से पहाड़ी पर चढ़कर पहुंचा जा सकता है।


माता श्री अरासुरी अम्बिका के निज मंदिर में श्री बीजयंत्र के सामने एक पवित्र ज्योति अटूट प्रज्ज्वलित रहती है। अम्बाजी के दर्शन के उपरान्त श्रद्धालु गब्बर पहाड़ी पर  जरूर जाते हैं।


इसके अलावा यहां अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं, जिसमें सनसेट प्वाइंट, गुफाएं, माताजी के झूले आदि भी देखने को मिलते है 



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