Kuldhara - The Most Haunted Village || Real Story of Kuldhara in Hindi

Kuldhara Village Story in Hindi

आपने भूतों वाली जगहों के बारे में बहुत सुना और देखा भी होगा लेकिन आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां पूरा गांव ही भूतिया है

Kuldhara Village 

real story of kuldhara जैसलमेर

भारत की पारंपरिक जमीन में कई ऐसे राज दफ्न हैं जो कई वर्षों या कहें सदियों बाद आज भी उसी तरह ताजा और अनसुलझे हैं जितने पहले कभी हुआ करते थे। ये रहस्य कुछ ऐसे हैं जिन्हें जितना सुलझाने की कोशिश होती है ये उतने ही उलझते जाते हैं। 

ऐसा ही एक राज दफ्न है राजस्थान के एक छोटे से kuldhara gaon के भीतर। कोई कहता है कि kuldhara की भूमि पर सैकड़ों वर्षों से भटकती आत्माओं का पहरा है तो कोई यह मानता है एक श्राप ने इस स्थान की तकदीर बदल दी।

Kuldhara History in Hindi

Kuldhara Rajasthan के जैसलमेर ज़िले में स्थित है एक शापित और रहस्यमयी गाँव है जिसे भूतों का गाँव (Haunted Village) भी कहा जाता है। इस गाँव का निर्माण लगभग १३वीं शताब्दी में पालीवाल ब्राह्मणों ने किया था। 

जैसलमेर से 17 किमी पश्चिम में स्थित, कुलधारा की एक कहानी है।  कुलधरा गांव के वीरान होने को लेकर एक अजीबोगरीब रहस्य है। कोई 300 साल पहले यह जैसलमेर राज्य के अंतर्गत पालीवाल ब्राह्मणों का एक समृद्ध गाँव हुआ करता था। लेकिन फिर जैसे कुलधरा को किसी की बुरी नजर लग गई, वो शख्स था रियासत का दीवान सालम सिंह।

अय्याश दीवान सालम सिंह जिसकी गंदी नजर गांव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा।

गांव वालों के सामने एक लड़की के सम्मान को बचाने की चुनौती थी। वह चाहते तो एक लड़की की आहुति देकर अपना घर बचाकर रख सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता चुना। एक रात 84 गांव के सभी ब्राह्मणों ने बैठकर एक निर्णय लिया कि वे रातों रात इस गांव को खाली कर देंगे 

लेकिन उस लड़की को कुछ नहीं होने देंगे। बस एक ही रात में कुलधरा समेत आसपास के सभी गांव खाली हो गए। जाते-जाते वे लोग इस गांव को श्राप दे गए कि इस स्थान पर कोई भी नहीं बस पाएगा, जो भी यहां आएगा वह बरबाद हो जाएगा।

कुलधरा गांव में एक मंदिर है जो आज भी श्राप से मुक्त है। एक बावड़ी भी है जो उस दौर में पीने के पानी का जरिया था। एक खामोश गलियारे में उतरती कुछ सीढ़ियां भी हैं, कहते हैं शाम ढलने के बाद अक्सर यहां कुछ आवाजें सुनाई देती हैं। लोग मानते हैं कि वो आवाज 18वीं सदी का वो दर्द है, जिनसे पालीवाल ब्राह्मण गुजरे थे। गांव के कुछ मकान हैं, जहां रहस्यमय परछाई अक्सर नजरों के सामने आ जाती है।

दिन की रोशनी में सबकुछ इतिहास की किसी कहानी जैसा लगता है, लेकिन शाम ढलते ही कुलधरा के दरवाजे बंद हो जाते हैं और दिखाई देता है रूहानी ताकतों का एक रहस्यमय संसार। लोग कहते हैं, कि रात के वक्त यहां जो भी आया वो हादसे की शिकार हो जाते है|

यह गाँव अभी भी भूतिया गाँव कहलाता है लेकिन अभी राजस्थान सरकार ने इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दे दिया है,इस कारण अब यहां रोजाना हज़ारों की संख्या में देश एवं विदेश से पर्यटक आते रहते है लेकिन जो भी पर्यटक यहां आते हैं उन्हें यहां कुछ अजीबोगरीब अहसास होने लगते हैं। किसी को आसपास चूड़ियों और महिलाओं के खिलखिलाने की आवाज आती है तो किसी को लगता है जैसे कोई उनके पास से गुजरा है।

इतिहासकारों के अनुसार पालीवाल ब्राह्मण बेहद अमीर थे, उनके पास सोने के बहुमूल्य आभूषण थे, जिन्हें वे जमीन में गाड़कर रखते थे। इसी वजह से जब यह गांव खाली हुआ तब यहां सोने के लालच में कई लोग आए जिन्होंने इस स्थान की खूब खुदाई की और जो सोना था वो ले कर भाग गए।

वहां काफी अन्य देवाली अभिलेख ( अथवा शिलालेख) हैं। ये अभिलेख पालीवाली शब्द का उल्लेख नहीं करते। ये अभिलेख यहाँ के निवासियों को ब्राह्मण बताया हैं। काफी अभिलेख इन निवासियो को कुलधर या कलधर जाति का बताते हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि पालीवाल ब्राह्मणों में कुलधर एक जाति समूह था, और इन्हीं के नाम पर गांव का नाम पड़ा।
kuldhara gaon के लोग वैष्णव धर्म के थे। इस गाँव का मुख्य मन्दिर विष्णु भगवान और महिषासुर मर्दिनी का है। हालाँकि ज्यादातर मूर्तियां गणेश जी की भी है जो प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित है। गाँव के लोग विष्णु ,महिषासुर मर्दिनी और गणेश जी के अलावा बैल और स्थानीय घोड़े पर सवार देवता की भी पूजा करते थे।

नैऋत्य कोण के वास्तु दोषों के साथ यदि ईशान कोण में भी वास्तु दोष हो यानि ईशान कोण में भी कमी हो, जैसे की ईशान कोण का दबा, कटा या घटा होना इत्यादि तो नैऋत्य के इस वास्तुदोष में और ज्यादा वृद्धि होती है। इन सभी कमियों की वजह से वहां उत्पन्न हुई नकारात्मक ऊर्जा को कभी-कभार भूत-प्रेत या बुरी आत्माओं का नाम दे दिया जाता है।


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